भाई दूज पर निबंध | Bhai Dooj Par Nibandh

भाई दूज पर निबंध – नमस्कार दोस्तों कैसे है आप सभी? मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अछे ही होंगे. दोस्तों क्या आप भाई दूज पर निबंध (Bhai Dooj Par Nibandh) लिखना चाहते हैं? यदि हाँ तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं। इस पोस्ट में हम आपके लिए Short Essay लेकर आये हैं जो की बहुत ही सरल भाषा में लिखे गये हैं। हमें उम्मीद है आपको ये भाई दूज पर निबंध पसंद आयेंगे। आप इस निबंध को स्कूल-कॉलेज या प्रतियोगिता आदि में लिख सकते हैं।

भाई दूज पर निबंध | Bhai Dooj Par Nibandh
भाई दूज पर निबंध | Bhai Dooj Par Nibandh

भाई दूज पर निबंध (450 शब्‍द)

प्रस्तावना – दीपावली हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्योहार है और पांच दिवसीय त्योहार के पांचवे दिन मनाया जाता है, भाई दूज का पर्व। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जा ता है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है, जिसे बड़ी श्रद्धा और परस्पर प्रेम के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन के बाद, भाईदूज ऐसा दूसरा त्योहार है, जो भाई बहन के अगाध प्रेम को समर्पित है। 

कैसे मनाते हैं – भाई दूभाई दूज का पर्व दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन वि‍वाहिता बहनें भाई बहन अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित करती है, और गोबर से भाई दूज परिवार का निर्माण कर, उसका पूजन अर्चन कर भाई को प्रेम पूर्वक भोजन कराती है। बहन अपने भाई को तिलक लगाकर, उपहार देकर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है। भाई दूर से जुड़ी कुछ मान्यताएं हैं जिनके आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग तरह ये मनाया जाता है।

भाई दूज की कथा – सूर्यदेव की पत्नी छाया की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती थी कि वे उसके घर आकर भोजन करें। लेकिन यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल जाते थे।कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर अचानक यमराज को खड़ा देखकर हर्ष-विभोर हो गई। प्रसन्नचित्त हो भाई का स्वागत-सत्कार किया तथा भोजन करवाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा।तब बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे। यमराज ‘तथास्तु’ कहकर यमपुरी चले गए। ऐसी मान्यता है कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं उन्हें तथा उनकी बहन को यम का भय नहीं रहता।

मान्यता – भाई दूज को लेकर यह मान्यता प्रचलित है, कि इस दिन भाई को तिलक लगाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराने से परस्पर तो प्रेम बढ़ता ही है, भाई की उम्र भी लंबी होती है। चूंकि इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज से वचन लिया था, उसके अनुसार भाई दूज मनाने से यमराज के भय से मुक्ति मिलती है, और भाई की उम्र व बहन के सौभाग्य में वृद्धि होती है। 

उपसंहार –  भाई का प्रेम है सबसे अलग। बहन के प्रति बचपन से ही चिंतित रहने वाले भाई के प्रति प्रेम प्रकट करने का इससे अच्छा अवसर दूसरा नहीं। जितना महत्व रक्षा बंधन को दिया जाता है उतना ही महत्व भाई दूज को भी दिया जाना चाहिए। बहन को चाहिए कि भाई को अपने घर बुलाकर उसे भोजन कराएं तथा लंबी उम्र की कामना के साथ छोटा-सा ही सही, पर उपहार जरूर दें।

भाई दूज पर 10 लाइन

  • भाई दूज पर्व दीपावली के बाद मनाया जाता है।
  • भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस दिन सभी बहने अपने भाई को तिलक लगाकर, उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करती है।
  • रक्षाबंधन के बाद भाई दूज ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के अपर प्रेम को दर्शाता है।
  • भाई-बहनों बीच के प्रेम को मज़बूत करने के लिए भाई दूज पर्व मनाया जाता है।
  • इस दिन विवाहित बहनें अपने भाइयों को अपने घर बुलाती है और उनकी खूब आदर-सत्कार करती है।
  • दीपावली का त्योहार भाई दूज अर्थात यम द्वितीया के साथ ही समाप्त हो जाता है।
  • यमराज ने अपनी बहन यमुना को यह वादा किया था की इस दिन जो भी भाई अपनी बहन से तिलक लगवाएंगे और अपनी बहन के घर जाकर भोजन प्राप्त करेंगे उन्हें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होगी।
  • भाई दूज अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से मनाया जाता है।
  • बदले में भाई भी अपनी बहनों को बहुत सारा उपहार देते है।

अंतिम शब्द

तो दोस्तों आज हमने भाई दूज पर निबंध (Bhai Dooj Par Nibandh) के बारे में विस्तार से जाना हैं और मैं आशा करता हूँ कि आप सभी को यह लेख पसंद आया होगा और आपके लिए हेल्पफुल भी होगा।

यदि आप को यह पोस्ट पसंद आई है तो इसे अपने सभी दोस्तों के साथ भी जरुर से शेयर करें। आर्टिकल को अंत तक पढने के लीयते आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!


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