व्याकरण के कितने भेद होते हैं: Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain

व्याकरण के कितने भेद होते हैं: दोस्तों यदि आप भी जानना चाहते हैं कि व्याकरण किसे कहते हैं (Vyakaran Kise Kahate Hain), और व्याकरण के कितने भेद होते हैं (Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain) तो यह लेख पढ़ने के बाद आप लोगों को पता चल जायेगा, अतः अंत तक पढ़े.

व्याकरण के कितने भेद होते हैं: Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain
व्याकरण के कितने भेद होते हैं: Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain

व्याकरण किसे कहते हैं (Vyakaran Kise Kahate Hain)

व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है।

भाषा की संरचना के ये नियम सीमित होते हैं और भाषा की अभिव्यक्तियाँ असीमित। एक-एक नियम असंख्य अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करता है। भाषा के इन नियमों को एक साथ जिस शास्त्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है उस शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

वस्तुतः व्याकरण भाषा के नियमों का संकलन और विश्लेषण करता है और इन नियमों को स्थिर करता है। व्याकरण के ये नियम भाषा को मानक एवं परिनिष्ठित बनते हैं। व्याकरण स्वयं भाषा के नियम नहीं बनाता। एक भाषाभाषी समाज के लोग भाषा के जिस रूप का प्रयोग करते हैं, उसी को आधार मानकर वैयाकरण व्याकरणिक नियमों को निर्धारित करता है। अतः यह कहा जा सकता है कि-

व्याकरण वह शास्त्र हैजिसके द्वारा भाषा का शुद्ध मानक रूप निर्धारित किया जाता है।

व्याकरण के कितने भेद होते हैं (Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain)

भाषा का मतलब एक प्रकार से बोलना या लिखना ही होता है। किसी भी भाषा में हम जो बोलना चाहते हैं उसे वाक्य में बोलना या लिखना होता है।

यानी वाक्य के जरिए ही भावनाओ या बातों को अलग-अलग भाषाओं की लिपियों में व्यक्त किया जाता है। तो जाहिर है हिंदी भाषा में भी वाक्य होता है, जो कि शब्दों से मिलकर बनता है और शब्द हिंदी भाषा के वर्णों से मिलकर बनते हैं।

इसी प्रकार से यदि व्याकरण के भेदो की बात की जाए तो, हिंदी व्याकरण के मुख्यतः 4 प्रकार निश्चित किए गए हैं जो निम्नलिखित हैं –

  • वर्ण विचार
  • शब्द विचार
  • वाक्य विचार
  • पद विचार

1. वर्ण विचार

वर्ण हिंदी भाषा की मूल इकाई  यानी की सबसे छोटी इकाई होती है, इन्हें और तोड़ा नहीं जा सकता, और इन्हीं को मिलाने से शब्दों का निर्माण होता है जिन्हें हम हिंदी में लिखते या बोलते हैं। हिंदी पढ़ते समय शुरुआत में हम जो अ आ, और क ख पढ़ते हैं वही वर्ण होते हैं।

हिंदी भाषा में कुल वर्णों की संख्या 52 है, और यही भाषा का आधार है, जिनसे शब्दों का और फिर वाक्य का निर्माण होता है। बिना हिंदी वर्णमाला के अध्ययन के हिंदी को समझना और बोलना संभव नहीं है।

हिंदी भाषा के 52 वर्णों को दो भागों में बांटा गया है, जिसमें स्वर वर्ण तथा व्यंजन वर्ण आते हैं। स्वर वर्णों की संख्या 11 है तथा 33 व्यंजन वर्ण है। इनके अलावा एक अनुस्वार (अं) और एक विसर्ग (अ:) है। साथ ही दो द्विगुण व्यंजन (ड़ और ढ़) तथा चार संयुक्त व्यंजन (क्ष,त्र,ज्ञ,श्र) भी हिंदी वर्णमाला में है।

वर्णमाला के दो मुख्य भेद स्वर वर्ण तथा व्यंजन वर्ण है। स्वर वर्ण उन्हें कहा जाता है जिन का उच्चारण स्वतंत्र होता है यानी उन्हें बोलने में किसी दूसरे वर्ण के सहायता की आवश्यकता नहीं होती है।

अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ स्वर वर्ण है। इसके बाद स्वर वर्णों के भी, उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर, उच्चारण करते समय मुंह की स्थिति तथा होठों की स्थिति के आधार, पर उप भेद होते हैं। क, ख इत्यादि व्यंजन वर्ण होते हैं तथा इनके भी अपने उप भेद होते हैं।

2. शब्द विचार

वर्णों के बाद बारी आती है शब्दों की। शब्द हिंदी भाषा का दूसरा खंड है, जिसे दो या दो से अधिक वर्णों को आपस में मिलाकर बनाया जाता है। जब दो या दो से अधिक वर्ण आपस में मिलकर एक सार्थक अर्थ देते हैं तब उसे शब्द कहा जाता है। उदाहरण के लिए घ तथा र दो वर्ण मिलकर एक सार्थक अर्थ दे रहे हैं, इसीलिए घर एक शब्द है।

व्याकरण में शब्दों का अलग-अलग आधार पर अलग-अलग उप भेद होते हैं। व्युत्पत्ति के आधार पर, प्रकार के आधार पर, अर्थ के आधार पर, रचना के आधार पर, प्रयोग के आधार पर शब्दों के कई सारे भेद होते हैं।

तत्सम शब्द, तद्भव शब्द, विकारी शब्द, अविकारी शब्द, सार्थक शब्द, निरार्थक शब्द रूढ़ शब्द, यौगिक शब्द, योगरूढ़ शब्द इत्यादि समेत पर्यायवाची, विलोम, अनेकार्थी इत्यादि शब्दों को भी शब्दों के भेद के अंतर्गत ही पढ़ा जाता है।

व्याकरण के शब्द खंड में इससे संबंधित पाठों जैसे संधि, रूपांतर, भेद उपभेद, परिभाषा इत्यादि का अध्ययन कराया जाता है।

3. वाक्य विचार

व्याकरण के इस भेद के अंतर्गत वाक्य के बारे में पढ़ा जाता है। शब्दों का कोई समूह जो एक सार्थक अर्थ देता  हो वाक्य कहलाता है। जैसे  – लड़का आ रहा है। तथा  रहा आ है लड़का।

इसमें पहले शब्दों के समूह का अर्थ है इसीलिए यह वाक्य है, जबकि दूसरे का कोई अर्थ नहीं निकल रहा है इसीलिए यह वाक्य नहीं है।

व्याकरण में वाक्य के भी भेद होते हैं। वाक्यों का वर्गीकरण दो आधार पर किया जाता है, दोनों ही आधारों पर वाक्य के अलग-अलग भेद होते हैं।

रचना के आधार पर वाक्यों का वर्गीकरण सरल वाक्य, मिश्रित वाक्य तथा संयुक्त वाक्य के रूप में किया गया है एवं अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद होते हैं जो विधान वाचक वाक्य, निषेधवाचक वाक्य, प्रश्नवाचक वाक्य, आज्ञा वाचक वाक्य, इच्छा वाचक वाक्य, संदेह वाचक वाक्य, विस्मय वाचक वाचक, संकेत वाचक वाक्य होते हैं।

4. पद विचार

हिंदी भाषा में वाक्य को बोला या लिखा जाता है, जब किसी शब्द का किसी वाक्य में प्रयोग किया जाता है तब एक विशेष शब्द को एक विशेष पद प्राप्त होता है, और व्याकरण के अंतर्गत पद विचार में इसी का अध्ययन होता है। 

  • मोहन कोई कार्य कर रहा है।

ऊपर लिखे हुए वाक्य में मोहन शब्द एक कर्ता है, यहां वह एक संज्ञा है तथा पुल्लिंग है। यहां मोहन शब्द के वाक्य में प्रयोग होने से इसे एक पद प्राप्त हुआ है।

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Conclusion

मैं उम्मीद करता हूँ कि अब आप लोगों को व्याकरण किसे कहते हैं (Vyakaran Kise Kahate Hain), और व्याकरण के कितने भेद होते हैं (Vyakaran Ke Kitne Bhed Hote Hain) से जुड़ी सभी जानकरियों के बारें में पता चल गया होगा। यह लेख आप लोगों को कैसा लगा हमें कमेंट्स बॉक्स में कमेंट्स लिखकर जरूर बतायें। साथ ही इस लेख को दूसरों के जरूर share करें, ताकि सबको इसके बारे में पता चल सके। धन्यवाद!

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