प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay)

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी? मैं आशा करता हु की आप सभी अछे ही होंगे। आज हम आप को प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay) के बारे में विस्तार से बतायेंगे।

प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay)
प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay)

प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay)

नाम (Name)श्री प्रणब कुमार मुखर्जी
जन्म (Date of Birth)11 दिसंबर 1935
आयु84 वर्ष
जन्म स्थान (Birth Place)बीरभूम, पश्चिम बंगाल
पिता का नाम (Father Name)किंकर मुखर्जी
माता का नाम (Mother Name)राजलक्ष्मी मुखर्जी
पत्नी का नाम (Wife Name)सुव्रा मुखर्जी
पेशा (Occupation )राजनेता
बच्चे (Children)2 बेटे, एक बेटी
भाई-बहन (Siblings)गया नहीं
अवार्ड (Award)पद्म विभूषण
मृत्यु (Death)31-08-2020

प्रणब मुखर्जी का जन्म

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसम्बर 1935 में मिराती, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (वर्तमान पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था। इनका पूरा नाम प्रणव कुमार मुखर्जी था। इनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था।

इनके पिता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे और 1952 और 1964 के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य थे। एवं जिसके साथ साथ वह एआईसीसी (AICC) के सदस्य भी थे और वह एक सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी भी थे। ये अपने माता पिता के दूसरे संतान थे तथा इनके दो भाई बहन है। इनकी बड़ी बहन का नाम अन्नपूर्णा और छोटे भाई का नाम पीयूष है।

प्रणब मुखर्जी जी की शिक्षा

प्रणब मुखर्जी जी ने शुरूआती पढ़ाई तो अपने गृहनगर के स्थानीय स्कूल में ही पूरी की, लेकिन आगे की पढ़ाई उन्होंने सूरी (वीरभूम) के सूरी विद्यासागर कॉलेज से राजनीति शास्त्र एवं इतिहास में स्नातक करते हुए पूरी की थी. फिर प्रणब जी ने कानून की पढाई के लिए कलकत्ता में एंट्री की और कलकत्ता यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया.

प्रणब कुमार मुखर्जी का निजी जीवन

13 जुलाई 1957 को प्रणब मुखर्जी का विवाह सुव्रा मुखर्जी से हुआ, जो बांग्लादेश के नरेला से थीं, और 10 साल की उम्र में कोलकाता चली गईं थी. इस दंपत्ति की एक बेटी और दो बेटे हैं. उनकी बेटी एक कत्थक नृत्यांगना है. उनका बड़ा बेटा अभिजीत मुखर्जी ने, उनके पिता प्रणब मुखर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल के जंगीपुर की सीट खाली करने के बाद, वहां से उप-चुनाव में चुनाव लड़े और कांग्रेस के सांसद बने. इससे पहले, अभिजीत मुखर्जी बीरभूम जिले के नलहटी नामक स्थान से विधायक रहे है. प्रत्येक वर्ष प्रणब मुखर्जी अपने परिवार के साथ और मिराती गांव में अपने पैतृक स्थान पर दुर्गा पूजा करने के लिए जाते है.

प्रणब कुमार मुखर्जी का राजनेतिक जीवन

अपने करियर की शुरुवात प्रणब मुखर्जीजी ने पोस्ट एंड टेलेग्राफ़ ऑफिस से की थी जहां वे एक क्लर्क थे. सन 1963 में विद्यानगर कॉलेज में वे राजनीती शास्त्र के प्रोफेसर बन गए और साथ ही साथ देशेर डाक में पत्रकार के रूप में कार्य करने लगे.

प्रणब मुखर्जी जी ने राजनैतिक सफ़र की शुरुवात 1969 में की. वे कांग्रेस का टिकट प्राप्त कर राज्यसभा के सदस्य बन गए, 4 बार वे इस पद के लिए चयनित हुए. वे थोड़े ही समय में इंदिरा जी के चहेते बन गए थे. सन 1973 में इंदिरा जी के कार्यकाल के दौरान वे औद्योगिक विकास मंत्रालय में उप-मंत्री बन गए. सन 1975-77 में आपातकालीन स्थिति के दौरान प्रणब मुखर्जीजी पर बहुत से आरोप भी लगाये गए. लेकिन इंदिरा जी की सत्ता आने के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गया. इंदिरा गांधी जी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रणब जी सन 1982से 1984 तक वित्त मंत्री के पड़ पर विराजमान रहे थे.

इंदिरा जी की मौत के पश्चात् राजीव गाँधी से प्रणब जी के संबंध कुछ ठीक नहीं रहे और राजीव गाँधी ने अपने कैबिनेट मंत्रालय में प्रणब जी को वित्त मंत्री बनाया था. लेकिन राजीव गाँधी से मतभेद के चलते प्रणब दा ने अपनी एक अलग “राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस” पार्टी गठित कर दी. सन 1985 में प्रणब जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे. थोड़े समय के बाद 1989 में राजीव गाँधी के साथ सुलह हो गई और वे एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ गए.

कुछ लोग इसके पीछे की वजह ये बोलते थे कि इंदिरा गाँधी की मौत के बाद प्रणब जी खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में देखते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद राजीव गाँधी से सब उम्मीद करने लगे. पी वी नरसिम्हा राव का प्रणब मुखर्जीजी के राजनैतिक जीवन को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है. पी वी नरसिम्हा रावजी जब प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने प्रणब मुखर्जीजी को योजना आयोग का प्रमुख बना दिया. थोड़े समय बाद उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य भी सौंपा गया.

सन 1999 से 2012 तक प्रणब मुखर्जी जी केंद्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष रहे. सन 1997 में प्रणब मुखर्जीजी को भारतीय संसद ग्रुप द्वारा उत्कृष्ट सांसद का ख़िताब दिया गया. जब सोनिया गाँधी ने राजनीती में आने का सोचा तो प्रणब मुखर्जीजी उनके मेंटर बने और उन्हें बताया कि कैसे उनकी सास इंदिरा जी काम किया करती थी. सोनिया गाँधी को कांग्रेस प्रमुख बनाने में प्रणब मुखर्जीजी का बहुत बड़ा हाथ है. राजनीती के सारे दाव पेंच सोनिया को प्रणब जी ने ही सिखाये थे. प्रणब जी के परामर्श के बिना सोनिया जी कुछ नहीं करती थी.

सन 2004 में प्रणब मुखर्जीजी ने जंगीपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर लोकसभा सदस्य बन गए. इनके साथ ही साथ कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में UPA बनी. प्रधानमंत्री पद को छोड़ कर वे रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और लोकसभा में पार्टी के नेता के रूप में सराहनीय काम किया. इस दौरान मनमोहन सिंहजी को प्रधानमंत्री बनाया गया.

कहते है अगर उस समय प्रणब मुखर्जी जी को प्रधानमंत्री बनाया जाता तो आज देश विकास के क्षेत्र में बहुत आगे होता. प्रणब मुखर्जी जी मनमोहन सिंहजी के बाद कांग्रेस के दुसरे बड़े नेता थे. प्रणब मुखर्जी जी को कांग्रेस पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता है. कांग्रेस की डूबती नैया को प्रणब मुखर्जीजी ने कई बार किनारे लगाया है. सन 1985 से प्रणब जी जो पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे, 2010 में उन्होंने किसी मतभेद के चलते उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

प्रणब मुखर्जी के पुरस्कार और सम्मान

प्रणब मुखर्जी को सन् 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया। न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 1984 में दुनिया के पाँच सर्वोत्तम वित्त मन्त्रियों में से एक प्रणव मुखर्जी भी थे।

उन्हें सन् 1997 में भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला। वित्त मन्त्रालय और अन्य आर्थिक मन्त्रालयों में राष्ट्रीय और आन्तरिक रूप से उनके नेतृत्व का लोहा माना गया। वह लम्बे समय के लिए देश की आर्थिक नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं।

उनके नेत़त्व में ही भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ऋण की 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की अन्तिम किस्त नहीं लेने का गौरव अर्जित किया। उन्हें प्रथम दर्जे का मन्त्री माना जाता है और सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमन्त्री की अनुपस्थिति में उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता की।

प्रणब मुखर्जी जी की मृत्यु

पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी जी का 31 अगस्त 2020 को स्वास्थ्य ख़राब होने की वजह से देहवसान हो गया है. प्रणब दा का पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य ठीक नहीं था, जिसके चलते उन्हें सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती किया गया था.

हालही में कुछ दिन पहले यह खबर आ रही थी कि प्रणब जी की हालत काफी गंभीर है वे कोमा में चले गया हैं और बाद में उन्हें वेंटीलेटर में भी रखा गया. इस बीच यह अफवाह भी फेल गई थी कि प्रणब दा का देहांत हो गया है. लेकिन अब यह खबर सही साबित हो गई है. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी अब हमारे बीच में नहीं है.

प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय – FAQs

प्रणब मुखर्जी कौन थे?

देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं कांग्रेस पार्टी के नेता.

प्रणब मुखर्जी जी का जन्म कब हुआ?

11 दिसंबर, 1935

प्रणब मुखर्जी की पत्नी कौन है?

सुव्रा मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी जी की बेटी कौन है?

शर्मिस्ठा मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी जी की मृत्यु कब हुई?

31 अगस्त, 2020

प्रणब मुखर्जी जी की उम्र क्या थी ?

84 साल

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अंतिम शब्द

तो दोस्तों आज हमने प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Ka Jivan Parichay) के बारे में विस्तार से जाना हैं और मैं आशा करता हु की आप को यह पोस्ट पसंद आया होगा और आप के लिए हेल्पफुल भी होगा।

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